
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि , हमारे देश में मौतें आंतकवाद से ज्यादा मोहब्बतवाद के कारण होती है । मोहब्बत के लिए मौत का सजा देना आम होता जा रहा है ,तभी तो पिछले महीने हरियाणा के हिसार जिलें के सुबाना गांव में एक युवा जोडे को लड़की के घरवालों ने पीट पीट कर मार डाला ,वहीं मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में भी एक प्रेमी जोड़े को बीच चैराहे पर लड़की के भाई ने काट डाला था ।इस तरह हमारे देश में लाखों लोगो की जान जा चुकी है । हिसाब रखने वाले तो गिनकर तक बता दिया है । आंकडो के अनुसार इश्क़ विश्क मंे जान देने वालों की तादात ,आंतकवाद से वजह से जान गंवाने वालों से थोड़ी बहुत ज्यादा नहीं ,कई गुना ज्यादा है । आंकडो पर नजर डाली जाए तो सन 2006 में देश भर में जो कुल 36 हजार लोग मारे गए , उनमें से 2547 प्यार के चक्कर में ही मारे गए थे ,जबकि आंतकवाद के चक्कर में केवल 894 निकले । यह किस्सा केवल 2006 का ही नहीं ,यह तो हर साल की कहानी है । हमारे यहां जिस तरह आंतकवाद का डर बताया जाता है , उससे ज्यादा डर तो मोहब्बतवाद से लगना चाहिए। मजे की बात यह है कि इश्क विश्क में जान देन वाले में आंध्र प्रदेश आगे निकल गया है । उनका स्कोर 405 का रहा यानी मोहब्बत के शहीदों में हर छटा आदमी आंध्रप्रदेश का ही था । 279 संख्या के साथ यूपी दूसरे व 233 अंको के साथ मप्र तीसरे स्थान पर है । हालांकि आंध्रप्रदेश इस मामले में आगे निकल गया हो ,उसमें हरियाणा तेजी से बढ़ रहा है वहां आज ही एक प्रेमिका को गांव वालों ने मौत के घाट उतार दिया । वहीं आंतकवाद के कारण जम्मू कश्मीर सबसे आगे है , जहां पर 2006 में 1861 लोग मारे गए , दूसरे नंबर पर 152 संख्या के साथ मणिपुर रहा और तीसरे नंबर पर 145 अंको के साथ झारखंड है।यानी हमारा देश में दो तरह के आंतको का बोलबाला है । दोनो आंतको के अलग अलगा इलाकों में जोर है । फिर भी मोहब्बतविरोधी आंतक की चुनौती ज्यादा बड़ी है। पर अफसोस की बात यह है कि हमारी सरकार आंतवाद से लड़ने के लिए तैयार है परंतु इस नरभक्षी आंतक से लड़ने के लिए नहीं ।


